ताई : चंद शब्द मेरी बहन के लिए।
ताई,
जिंदगी हमेशा गैरो के साथ गुजारी हैं,
अपनो से लड़ते लड़ते।
किस्मत पे कभी भरोसा न था,
की कोई मेरा अपना भी होगा।
किस्मत बड़ी वाहियात चीज होती है
सुना था,
आज महसूस कर रहा हूँ।
बस ढूंढ रहा था अपनी मंजिल,
आज तक दर बदर,
यू भटकते भटकते तेरी,
चौकट पे आया में,
पल भर, अपनी किस्मत से घबराया मैं,
ये कैसी बैचेनी थी,
जर्रा जर्रा चीख उठा था,
प्यार का एक मीठा सोता,
मैंने आज पाया था।
तनहा था में जिंदगी भर,
अकेले चलता रहा,
आज अपना कोई मिल गया,
खुशी से झूम उठा, मेरा दिल!
अनुकंपा प्यार की,
आज तक न देखी,
किसी की बोलचाल में,
न ही किसी की आंखों में,
एक बार फिर अपनी किस्मत से,
घबराया मैं पलभर,
थोडासा सहम सा गया मैं,
उसे देख कर बस यही,
खयाल आया!
इस जिंदगी के दहकते अंधेरे में,
एक ध्रुव तारा,
मेरे आसमाँ में खिला है।
चमचम चांद की भांति,
उसकी शीतलता का,
एहसास मुझे हो रहा हैं।
क्या सच मैं ?
काबिल हूँ मैं इसके ?
फिर अंदर से आवाज आयी,
शायद आज तू काबिल न हो,
पर काबिल बन सकता हैं।
ये एक ऐसा झरना हैं,
जो प्यासे की प्यास बुझा सकता हैं।
काबिल बनना ही तेरी किस्मत हैं।
समेट अपनी सासें,
निकल चल एक नई राह पर,
तेरी मंजिल, तेरा वक़्त तुझे बुला रहा हैं।
~@BrotherBheem.
The poem connotes deep love, sensitivity n sharing of very strong bond with sister...Wonderful approach to express thoughts in unique manner...Just lovable
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